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‘गुरुकुल’’ का नाम सुनकर चौंकिएगा नहीं, क्योंकि मैं वैदिककालीन आर्य परम्परा की शिक्षा प्रणाली का प्रेत नहीं हूँ बल्कि भूत को वर्तमान में जीवित रखने वाला एक जीवन्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हूँ। इसमें पौर्वात्य और पाश्चात्य, प्राचीन एवं अर्वाचीन तथा दक्षिण एवं उत्तर की शिक्षा प्रणालियों का अपूर्व मिश्रण है। भारतीय संस्कृति-समन्वय की भावमयी एकता का मैं ज्वलन्त प्रतीक हूँ। मेरा कार्यक्षेत्र भी ऐकान्तिक न होकर अनेकान्तधर्मी है। मैं जहाँ अपने बालकों को लौकिक ज्ञान प्रदान करता हूँ, वहीं उन्हें ज्ञानचारित्रात्मक नीति और धर्म से सुसंस्कृत भी करता हूँ।

गुरुकुल छात्रावास के साथ-साथ गुरुकुल विद्यालय का भी जन्म हुआ परन्तु जब गुरुकुल विद्यालय की स्थापना की गई तब आज जैसी अनुकूल स्थिति नहीं थी। गुरुकुल के जन्म से लगभग 12-13 वर्ष यहाँ के छात्र हाईस्कूल परीक्षा स्वाध्यायी छात्रों के रूप में दिया करते थे। यह स्थिति अन्तेवासियों में हीनता की भावना को जन्म देती तथा उनके व गुरुकुल के विकास मार्ग में अवरोध का साक्षात् कारण थी। और अंततः सन् 1957-58 के पावन सत्र में गुरुकुल को शासकीय मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। और हीनता के स्थान पर स्वाभिमान का उदय हुआ। हायर सेकण्डरी के परीक्षा परिणाम के बाद से धीरे-धीरे गुरुकुल विद्यालय में प्रवेशार्थियों की संख्या बढ़ने लगी। सन् 1963-64 में प्रयोगशाला, प्राचार्य कक्ष, कार्यालय, पुस्तकालय आदि को भी आश्रय प्राप्त हुआ। सन् 1976 में प्राचार्य डॉ. नेमिचन्द जी जैन के अथक प्रयासों से पहली बार बालिकाओं को प्रवेश दिया गया। इस प्रकार के अनेकानेक उतार-चढ़ाव के पश्चात् गुरुकुल में अनेकानेक सुविधाऐं जुटाई गईं और आज गुरुकुल विद्यालय समृद्ध हो चुका है। गुरुकुल विद्यालय को इस मुकाम तक पहुँचाने में डॉ. परमेष्ठीदास जी जैन, डॉ. नेमिचन्द जी जैन जैसे समर्पित शिक्षाविदों का विशेष स्थान रहा है।

वर्तमान में गुरुकुल विद्यालय में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक लगभग 1200 छात्र-छात्रायें अध्ययनरत् हैं। जिन्हे शिक्षा के साथ-साथ खेल-कूद, संगीत, योग, बौद्धिक गतिविधियों जैसे वादविवाद, तात्कालिक भाषण, निबंध, भाषण आदि की भी शिक्षा प्रदान की जा रही है। इन गतिविधियों के साथ-साथ एन.सी.सी., स्काउट आदि का भी सफल संचालन किया जाता है, जिसके माध्यम से बच्चे देश सेवा में भी अपना योगदान दे पायें। कक्षा छठवीं से दसवीं तक हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सा. विज्ञान विषयों का अध्ययन कराया जाता है तो वहीं ग्यारहवीं एवं बारहवीं में हिन्दी, अंग्रेजी विषयों के साथ-साथ कॉमर्स, कला, कृषि, वाणिज्य, विज्ञान संकायों का संचालन किया जाता है।