‘‘शाब्दिक व्यंजना से श्रेष्ठ साक्षात् अवलोकन’’

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‘‘गुरुकुल’’ का नाम सुनकर चैकियेगा नहीं, क्योंकि यह वैदिककालीन आर्य परम्परा की शिक्षा प्रणाली का प्रेत नहीं है बल्कि भूत को वर्तमान में जीवित रखने वाला एक जीवन्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है। इसमें पौर्वात्य और पाश्चात्य, प्राचीन एवं अर्वाचीन तथा दक्षिण एवं उत्तर की शिक्षा प्रणालियों का अपूर्व मिश्रण है। भारतीय संस्कृति-समन्वय की भावमयी एकता का यह ज्वलन्त प्रतीक है। गुरुकुल का कार्यक्षेत्र भी ऐकान्तिक न होकर अनेकान्तधर्मी है। यह जहाँ अपने बालकों को लौकिक ज्ञान प्रदान करता है, वहीं उन्हें ज्ञानचारित्रात्मक नीति और धर्म से सुसंस्कृत भी करता है।
शिक्षा जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है। एक बालक को सुबोध, संस्कारित, ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, कर्तव्यपरायण करने का कार्य केवल शिक्षा ही करती है। आज वर्तमान में सम्पूर्ण देश में शिक्षा के अनेकानेक केन्द्र स्थापित हैं लेकिन आपको गौरवान्वित होना चाहिए कि आपने गुरुकुल को चुना। आपको गर्व होना चाहिए कि आप एक प्रतिष्ठित, विश्वसनीय और सर्वदा श्रेष्ठ परिणाम देने में सक्षम संस्थान में प्रवेश ले रहे हैं। हो सकता है कि आपको गुरुकुल विद्यालय में प्रवेश दिलाने वाले पथप्रदर्शक भी इस बात से भली-भाँति आश्वस्त हों, तभी उन्होंने आपके लिये बेहतर विकल्प के रुप में यहाँ प्रवेश हेतु आपसे आग्रह किया।
गुरुकुल के विषय में आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि आजादी के पूर्व से स्थापित, विगत 75 वर्षों से शिक्षा के पर्याय के रुप में संलग्न इस संस्थान का नाम देश में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में सम्मान से लिया जाता है क्योंकि यह वह वटवृक्ष है जिसकी शाखाएँ पूरे विश्व में फैली हैं।

गुरुकुल विद्यालय विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ-साथ भविष्य निर्माण में भी सहायता प्रदान करता है अर्थात् जितनी आपको अपने वर्तमान की चिंता है उससे अधिक गुरुकुल को आपके भविष्य की चिंता है। हम यह चाहते हैं कि आपको समाज में वह श्रेष्ठ स्थान प्राप्त हो जिसकी कल्पना आपने स्वप्न में देखी है। गुरुकुल अपने विद्यार्थियों के लिये सर्वांगीण विकास की अवधारणा मात्र प्रस्तुत नहीं कराता अपितु हकीकत में उनको पंख भी देने का कार्य करता है, जिसका परिणाम आज प्रत्यक्ष दिखाई देता है।
गुरुकुल में आज शिक्षा के साथ-साथ खेल-कूद, संगीत, योग, बौद्धिक गतिविधियाँ जैसे वादविवाद, तात्कालिक भाषण, निबंध, चित्रकला, भाषण आदि की भी शिक्षा प्रदान की जा रही है। इन गतिविधियों के साथ-साथ छात्र एवं छात्राओं के लिये एन.सी.सी. का भी सफल संचालन किया जाता है, जिसके माध्यम से बच्चे देश सेवा में भी अपना योगदान दे पायें। कक्षा छठवीं से दसवीं तक हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सा. विज्ञान विषयों का अध्ययन कराया जाता है तो वहीं ग्यारहवीं एवं बारहवीं में हिन्दी, अंग्रेजी विशयों के साथ-साथ गणित, कला, कृषि, वाणिज्य, विज्ञान संकायों का संचालन किया जाता है।
विद्यार्थियों में विनय, अनुशासन एवं नैतिक सस्कारों का विकास करना तथा जीवनोपयोगी लौकिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा सुयोग्य नागरिक बनाना संस्था का उद्देश्य है।

सादर सहित,

श्री प्रयंक जैन